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Archive for June, 2009


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जब हमने नेताजी से,
उनमे और अभिनेता में फर्क पूछा,
तो वे इतना सा फर्क बतलाते है।

अभिनेता नकली जिन्दगी से तो,
हम असली जिन्दगी से कमातें हैं।

अभिनेता फिल्मों में नकली मारधाड़ करतें हैं,
हम तो लाइव शो करवातें हैं।

अभिनेता “100 Days” फिल्म बनातें है,
हम 100 Days की सरकार बनाते हैं।

और सबसे अहम् फर्क तो ये हैं,
अभिनेता मंच पर और,
हम माइक पर जनता को मुर्ख बनाते हैं।

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सारे भाषण व्यर्थ हैं,
व्यर्थ हैं सारे काम,
दहेज़ लेकर खाइए,
रोज़ घर में बादाम।

रोज़ घर में बादाम,
करो माँ बाप की सेवा,
इससे बढ़कर नहीं मिलेगा,
दुनिया में मेवा।

कहें दुल्हे के माँ बाप,
काम कुछ ऐसा कर जा,
शादी तो निश्चित हैं,
कुछ तिकड़म तू कर जा,
ले दहेज़ मनचाहा,
संकट सारे तू हर जा।

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हरे भरे पेडों को काटते देख,
जब उनसे पूछा गया इसका कारण,
तो उन्होंने इतना ही बतलाया,
कल यहाँ पर मंत्रीजी आयेंगे,
हम यहाँ उनके लिए जगह बनायेगें,
क्योंकि वृक्षारोपण कार्यक्रम के तहत,
वे यहाँ ढेरों पेड़ लगायेंगे।

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नेताजी सत्ता में आते हैं,
पद और गोपनीयता की शपथ खातें हैं।

गोपनीयता की शपथ कुछ यूँ निभाते हैं,
कुछ भी दे दो रिश्वत में,
उसको तुंरत पचाते हैं।

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तेरी याद में इतने पागल हुए,
मरने के लिए कीडे मारने की दवा लाये,
पर मरते क्या खाकर,
जब दवा में ही कीडे लग गए।

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कुर्सी पर बैठे ऊँघ रहे मंत्री श्री हरकार,
घूम रहे थे आगे पीछे मच्छर तीन चार,
मच्छर तीन चार, बॉडी गॉर्ड बुलाया,
अपनी परेशानी का कारण उसे बताया,
बॉडी गॉर्ड ने तुंरत अपना फ़र्ज़ निभाया,
सारे मच्छरों को दूजे धाम पहुँचाया।

एक मच्छर कुर्सी से चिपक गया,
तो मंत्रीजी को गुस्सा आया,
सेक्रेटरी ने मंत्रीजी को कारण बतलाया।

सर, इसने आपका खून पिया हैं,
कुछ तो असर आएगा,
कुर्सी पर ये बैठा था,
कुर्सी से चिपक मर जायेगा।

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