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Archive for September, 2009


लो बीत गए 26 बरस, सपनो सा लगता जहाँ अभी,
मीलों पैदल चल कर आये, मीलों पैदल चलना हैं अभी।
कुछ साथ अनुभवों को लेकर, कुछ साथ दुआओं को लेकर,
कुछ साथ यादों को लेकर, आगे बढ़ना हैं और अभी।

जननी की मीठी लोरी की,
मिठास आज तक आती हैं,
वो आँचल की छाँव कवच सी,
आज भी साथ निभाती हैं,
लो बड़े हुए तो भूल गए,
वो आदतें सारी बचपन की।
लो बीत गए……………

चलती हैं रातें पूनम की,
कभी दौर अमावास के आतें है,
कुछ सपने सपने रहतें है,
कुछ सपने जीवन बन जातें हैं,
जीवन तो यु ही चलता हैं,
कुछ समय निकालों कभी कभी।
लो बीत गए…………….

जीवन की टेढी गलियों से,
अनुभव के लम्हें गुजरतें हैं,
कुछ खट्टी यादें जीवन में,
कुछ मीठे पल भी मिलतें हैं,
मिलतें है यहाँ पर रावन तो,
मिलतें है यहाँ पर राम कभी।
लो बीत गए…………….

आगे की और मुंह कर के,
चलतें हमेशा जाना हैं,
कुछ कंकड़ पत्थर राहों के,
उनको हटाते जाना है,
चलना ही है नियति तेरी,
एक दिन मंजिल को पाना हैं,
चलते-चलते राहों में,
यु ही साथ रहें हरदम सभी।
लो बीत गए…………….

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जब भी सोचा, पा लिया करती थी उसे,

जब भी रूठे, मना लिया करती थी उसे,

रुलाती थी उसे, हंसाती थी उसे,

हर क्षण हर घडी दिल में बसाती थी उसे,

चाहत थी उसकी, या चाहत थी मेरी,

हर दुआ में माँगा करती थी उसे,

एक पल की जुदाई भी गवारा थी,

हर ख्वाब में जा मिलती थी उससे,

एक पल का बिछोह भी सहन था,

हर दम यही कहती थी उसे,

मिलना उससे थी चाहत मेरी,

खुदा की रहमत कहती थी उसे,

सांसो की तरह भाता था वो,

धड़कन की तरह लगती थी उसे,

एक पल को नहीं, सदियों के लिए,

सीने में छुपाये रखती थी उसे,

रोती थी बहुत, जब कहता था,

एक दिन दूर ही जाऊँगा तुमसे,

था मंजूर किस्मत को,

या थी मर्ज़ी बहारों की,

खो गयी हस्ती ही मेरी,

हो गयी दूर मैं उससे|

चाहता वो भी है वैसे,

चाहती थी मैं जैसे,

था मंजूर किस्मत को,

हो गयी दूर मैं उससे|

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हसरत है जो पहली नज़र से,
काश हुस्न उसे समझ पाए कभी।

हो जाए ख़त्म ये दर्द-ऐ-दिल,
जो दुआ में वो मांग ले मुझे कभी।

तडपता है ये दिल कितना उनके लिए,
काश ये सब उन्हें समझ में आये कभी।

भटक रहा हूँ कब से  उनकी चाह में,
इस उल्फत को वो मिटाए कभी।

नहीं करती उनकी तस्वीर बात हमसे,
वो अपनी नज़र का जादू चलायें कभी।

दूर तक फैला है अँधेरा मेरी तन्हाई का,
आकर चिराग-ऐ-दिल जलाये कभी।

ना  जाने मेरे प्यार के बारे में वो,
और यूँ ही मिल जाये हम कभी।

हसरत है जो पहली नज़र से,
काश हुस्न उसे समझ पाए कभी।

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