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Archive for November, 2010


आज मानव खुद ही,

मानव से डरने लगा हैं,

खुद अपनी ही परछाई से,

दूर भागने लगा हैं,

आज इस कलियुग में,

तुच्छ स्वार्थ की खातिर,

मानव दूसरों को नहीं,

खुद को ही मारने लगा हैं|

 

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मिट जाएगा हर कण तेरा,

अगर इधर का रूख होगा,

मेरा कश्मीर तो वहीँ होगा,

पर पाकिस्तान नहीं होगा|

 

भारत की धरती गूंजेगी,

हर भारतीय नारा लगाएगा,

फिर लद्दाखी सीमा पर,

ये शैतान सिंह चिल्लाएगा,

अगर तूने इधर आँख उठाई,

तेरा वजूद नहीं होगा,

मेरा कश्मीर तो वहीँ होगा,

पर पाकिस्तान नहीं होगा|

 

जन जीवन आज झुलस रहा है,

इस आतंकवादी दल-दल में,

आतंकवाद पनप रहा है,

पाकिस्तानी जर्जर वृक्ष में,

चली कुल्हाड़ी भारतीयता की तो,

ये वृक्ष खड़ा नहीं होगा,

मेरा कश्मीर तो वहीँ होगा,

पर पाकिस्तान नहीं होगा|

 

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