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Archive for November, 2015


काश कोई तो सुन ले,

मैं इतना क्यों चिल्लाता हूँ,

छलकता देख कर पैमाना,

काश कोई तो आ जाए,

यु सब्र के पैमाने जितना,

गम तो मैं पी जाता हूँ|

कुछ लोग चले आते है जब,

मैं फूलों सा खिल जाता हूँ,

जब रंग बदलते गिरगिट सा,

पतझड़ सा हो जाता हूँ|

दुनिया में लोग हजारो है,

कुछ अपने, कुछ बेगाने है,

बेगानो का क्या कहना,

अपनों के रंग हजारो है,

कुछ फूलों को चुनते-चुनते,

लाखों कांटे पा जाता हूँ|

जिन्दगी के रास्ते भी,

घुमावदार बन पड़े है,

रोज निकलता हूँ,

खुशियाँ ढूंढने,

पर हर जगह गम के व्यापारी पाता हूँ|

उनके दिल की बाते कुछ सुनता हूँ,

कुछ अपनी भी कह आता हूँ,

वो भी हल्के हो जाते है,

मैं भी हल्का हो जाता हूँ||

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कहराते हुए देखे है कुछ लोग, दम तोड़ते हुए देखे है कुछ लोग,

नशे के पाश में जकड़े हुए, सांसों का दामन छोड़ते देखे है कुछ लोग|

दुखी देखे है कुछ लोग, तरसते खाने को कुछ लोग,

परिवार उजड़ते देखे है, संकट में घिरे हुए कुछ लोग|

गाढ़ी कमाई को खर्च करते, आर्थिक दंड भुगतते कुछ लोग,

आफिस में ताने पाते, केरिअर चोपट होते कुछ लोग|

कटोरा हाथ में लेकर, तरसते दानो को कुछ लोग,

कभी कौनो में गिरे, कभी नाली में पड़े कुछ लोग|

मिटाने गम जिन्दगी के, मदिरा में गिरे हुए कुछ लोग,

क्षणिक दुखो को भूल, ग़मों ने डूबते कुछ लोग|

शौक में सेवन करते लोग, आदी बनते जाते लोग,

लगा है दावानल ऐसा, आहूत होते जाते लोग|

गलत कामो की तरफ चलते चले जाते कुछ लोग,

अपराधिक जगत में भी, कमाते नाम ऐसे लोग|

क्यों सदविचारों से भटकते जाते है ये लोग,

नरक के द्वार में ऐसे क्यु घुसते जाते ये लोग,

क्यु परिवार से इतनी नफरत करते है ये लोग,

क्यु डाक्टर की जीविकापार्जन का साधन बनते जाते ये लोग,

आओ सभी मिल जुल बचाए भटके हुए कुछ लोग,

नशा मुक्ति के दीपक आज मिल कर जलाए हम लोग,

कर त्याग नशे का आज नशा मुक्त बांये कुछ लोग,

बन कर पथ दर्शक, आज सभी को राह दिखाए हम लोग||

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