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Archive for September, 2016


छोटी छोटी अभिलाषाएं घुट जाती है मन में,
बड़े बड़े सपनो में आखिर ये क्यों होता है,
अंजाम सभी को अपना अपना मालुम है, लेकिन
सपनो में फिर भी मानव यु क्यों खोता है,
सुलझाने की कोशिश में गांठे उलझती जाती है,
जीवन में आखिर ये द्वन्द क्यों होता है,
मानवता का क्रंदन सुन कर हँसता मानव,
मानवता का कत्ल यहाँ पर क्यों होता है,
रिश्ते नातो की भीड़ में यु खड़ा अकेला,
एकाकी सा बोझ जीवन का क्यों ढोता है,
क्या चाहत है,
क्या मंजिल है,
क्या चिन्ता है,
क्या चिंतन है,
क्या जीवन है,
क्या जीना है,
क्या खोना है,
क्या पाना है,
आडम्बर का बोझ हटा कर,
आखिर क्यों नहीं जीता है,
अरमानो के द्वन्द मिटा कर,
“भरत” क्यों नहीं जीता है,
आखिर ऐसा क्यों होता है
आखिर ऐसा क्यों होता है……

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