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Archive for January, 2017


पिता पुत्र आपस मे बतिया रहे थे,
किस्से अपने अपने सुना रहे थे,
पिता बोले-
एक समय ऐसा होता था,
जब नौकरी मे इतना पैसा नही होता था,
तब भी हम अच्छे से घर चलाते थे,
और दो पैसे भी बचाते थे,
50 रूपये लेकर जाते थे,
और महीने भर का राशन ले आते थे,
बेटा बोला-
पिताजी आजकल यह मुमकिन नही होता है,
हर दुकान मे CCTV लगा होता है॥

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मत कर क्रंदन, ओ मेरे मन,

नव दिन आया, कर अभिनन्दन|

भूल पुराने दुःख के दिन,

नव दिन आया, कर अभिनन्दन|

पेड़ों पर फिर पंछी चहके,

सुरम्य हो गया फिर उपवन,

भौर हुई, ये राते बीती,

सुखमय होगा हर एक क्षण||

चलने लगे नभ से सितारे,

आने को आतुर है किरण,

नभ से कालिख हटने लगी,

लगने लगा सिंदूरी गगन||

दिल से दिल का रिश्ता जुड़े,

मिल जाये हर एक का मन,

विश्व शान्ति का मार्ग प्रशस्त हो,

ऐसी बिखरे पहली किरण||

निर्मल धारा बहे जगत में,

कही कभी ना हो अनबन,

खुशहाली का लेप लगा कर,

शीतल हो जाए हर एक मन||

नव दिन आया, कर अभिनन्दन|

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नए सपने लेकर,
नए संकल्प लेकर,
नयी रौशनी संग,
नया सवेरा आया है ।
पंख लगा कर गगन में उड़ ले,
आँखों में अरमान भर ले,
खुले आसमान में सितारों संग,
नया सवेरा आया है ।
ओस के मोती सजाये,
कलियों के अरमान जगाये,
कोयल के मधुर गान संग,
नया सवेरा आया है ।
सपने सुहाने नए साल में,
बिखरे मुस्काने नए साल में,
नव संकल्प हो नए साल में,
बढे प्रेम इस नए साल में,
चहु और खुशहाली नए साल में,
प्रेम शकुन की बंसी के संग,
नया सवेरा आया है ।

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