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Archive for October, 2017


मन से मन का मैल मिटाये,
आओ इस दीवाली में,
जग मग मन का हर कण बनाए,
आओ इस दीवाली में,
अमीरो के घर पर शोर शराबा,
चलो गरीब के घर दीप जलाए,
आओ इस दीवाली में।

कुछ ऐसा संकल्प कर ले,
आओ इस दीवाली में,
रोटी रूपी रोशनी महके,
हर एक गरीब की थाली में,
जग में खुशियों के दीप जलाए,
आओ इस दीवाली में।

शुद्ध आचरण की बगिया महके,
दुष्ट आचरण की थाली खाली,
आओ इस दीवाली में,
हो नैतिकता की प्राण प्रतिष्ठा,
मानवता के पुष्प खिलाये,
आओ इस दीवाली में।

तिमिर का कर नाश,
सत्य का दीप जलाये,
आओ इस दीवाली में।
तमसो म ज्योतिर्गमय का
भाव जगाये,
आओ इस दीवाली में।

हो महावीर सी समता साधना,
सुख संतोष समाये मन में,
आओ इस दीवाली में।
कुंठाओ का ह्रास करे,
अंतर्मन का दीप जला कर,
“भरत” आओ इस दीवाली में॥

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