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भाव के गुलदस्ते से झलकता,
अप्रतिम प्यार हो तुम,
गुदगुदाती, खिलखिलाती,
ह्रदय की झंकार हो तुम,
शून्य सी पड़ी चेतना में,
प्राण का संचार हो तुम,
जिंदगी के वाद्य का,
अनछुआ सा तार हो तुम,
दे दिए सुर कई अनोखे,
सूक्ति का संचार हो तुम,
गीत जो लिखने चला था,
गीत का हर भाव हो तुम,
आँख बंद कर बैठे क्षण भर,
स्वपन का आभास हो तुम,
गर खुले आँखे स्वपन से,
तेज बन साकार हो तुम,
दीप भी तुम, बाती भी तुम,
लौ बन प्रज्ज्वलित होती,
अग्नि की आहुति हो तुम,
कुछ कहा सा, कुछ सुना सा,
कुछ गढ़ा सा, अनगढ़ा सा,
कुछ बुना सा, अनबुना सा,
कुछ सुखद सा, कुछ दुखद सा,
“भरत” अनुभूतियों में बसा ,
मेरा सारा संसार हो तुम।

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महंगाई


पिता पुत्र आपस मे बतिया रहे थे,
किस्से अपने अपने सुना रहे थे,
पिता बोले-
एक समय ऐसा होता था,
जब नौकरी मे इतना पैसा नही होता था,
तब भी हम अच्छे से घर चलाते थे,
और दो पैसे भी बचाते थे,
50 रूपये लेकर जाते थे,
और महीने भर का राशन ले आते थे,
बेटा बोला-
पिताजी आजकल यह मुमकिन नही होता है,
हर दुकान मे CCTV लगा होता है॥


मत कर क्रंदन, ओ मेरे मन,

नव दिन आया, कर अभिनन्दन|

भूल पुराने दुःख के दिन,

नव दिन आया, कर अभिनन्दन|

पेड़ों पर फिर पंछी चहके,

सुरम्य हो गया फिर उपवन,

भौर हुई, ये राते बीती,

सुखमय होगा हर एक क्षण||

चलने लगे नभ से सितारे,

आने को आतुर है किरण,

नभ से कालिख हटने लगी,

लगने लगा सिंदूरी गगन||

दिल से दिल का रिश्ता जुड़े,

मिल जाये हर एक का मन,

विश्व शान्ति का मार्ग प्रशस्त हो,

ऐसी बिखरे पहली किरण||

निर्मल धारा बहे जगत में,

कही कभी ना हो अनबन,

खुशहाली का लेप लगा कर,

शीतल हो जाए हर एक मन||

नव दिन आया, कर अभिनन्दन|


नए सपने लेकर,
नए संकल्प लेकर,
नयी रौशनी संग,
नया सवेरा आया है ।
पंख लगा कर गगन में उड़ ले,
आँखों में अरमान भर ले,
खुले आसमान में सितारों संग,
नया सवेरा आया है ।
ओस के मोती सजाये,
कलियों के अरमान जगाये,
कोयल के मधुर गान संग,
नया सवेरा आया है ।
सपने सुहाने नए साल में,
बिखरे मुस्काने नए साल में,
नव संकल्प हो नए साल में,
बढे प्रेम इस नए साल में,
चहु और खुशहाली नए साल में,
प्रेम शकुन की बंसी के संग,
नया सवेरा आया है ।

माँ


उसके चेहरे को देख कर लग रहा था की जैसे यह कई दिनों से सोई नहीं है, चेहरे पर थकान की रेखा उभरती तो थी, पर मात्र एक क्षण के लिए| शायद किसी बात का शकुन था जो थकान को एक पल से ज्यादा टिकने ही नहीं देता| रोज देख कर लगता था कि यह महिला किसी भिखारी गैंग का ही हिस्सा है, लेकिन आज मन ने कहा और मैंने 10 का नोट उसके हाथ पर रख दिया, दिल से दुआयें देती वह आगे निकल गई| शाम को आफिस से वापिस आते समय जब लाल बत्ती पर लगे जाम में रुका तो उसी महिला को फुटपाथ पर बैठा देख कर नज़रे उसी पर केन्द्रित हो गयी| हाथ पंखे से स्ट्रीट लाईट में बैठे, नई स्कूल ड्रेस पहने, नया बेग पास में रखे, एक वर्ण माला की किताब हाथ में लिए, एक 6 वर्षीय बालक को पंखा झलते हुए उस माँ के चहरे पर एक ख़ुशी झलक रही थी| शायद जीवन की कठिनाइयो को सहन कर सीप सम कठोर माँ केआँचल में एक अनमोल मोती मूर्त रूप ले रहा था|


सांसो की करेंसी एक दिन Out of Date हो जायेगी,
तब तक इंतज़ार किया तो बहुत Late हो जायेगी,
कमा लो कुछ खुशियां, कुछ हंसी, कुछ अच्छे कर्म,
भर लो खजाने रिश्तो के, मुस्कानों के,
यही वो पूँजी है तो सात पीढ़ी के काम आएगी।
“भरत” मरने के बाद भी तुम्हे लोगो के बीच जिन्दा कर जायेगी।

।।ॐ अर्हम।।


छोटी छोटी अभिलाषाएं घुट जाती है मन में,
बड़े बड़े सपनो में आखिर ये क्यों होता है,
अंजाम सभी को अपना अपना मालुम है, लेकिन
सपनो में फिर भी मानव यु क्यों खोता है,
सुलझाने की कोशिश में गांठे उलझती जाती है,
जीवन में आखिर ये द्वन्द क्यों होता है,
मानवता का क्रंदन सुन कर हँसता मानव,
मानवता का कत्ल यहाँ पर क्यों होता है,
रिश्ते नातो की भीड़ में यु खड़ा अकेला,
एकाकी सा बोझ जीवन का क्यों ढोता है,
क्या चाहत है,
क्या मंजिल है,
क्या चिन्ता है,
क्या चिंतन है,
क्या जीवन है,
क्या जीना है,
क्या खोना है,
क्या पाना है,
आडम्बर का बोझ हटा कर,
आखिर क्यों नहीं जीता है,
अरमानो के द्वन्द मिटा कर,
“भरत” क्यों नहीं जीता है,
आखिर ऐसा क्यों होता है
आखिर ऐसा क्यों होता है……