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Posts Tagged ‘कवि’


बादल

बादल जो घिरे,
कई रंगों से भरे,
आपस मे मिले,
मिल कर कड़के,
किरणों से मिले,
सतरंगी आँचल लिए,
कल्पना के पटल पर,
हजारो रंग भर दिए,
आकाश में,
उन्मुक्त विचरते,
पवन के वेग संग,
आंनद में भरते,
हज़ारो बूंद बन,
धरती पर बिखरते,
नाचती कूदती बूंदों सी,
अठखेलिया करते,
मिल कर रेत संग,
उसके सीने में दफन होते,
हर एक के जीवन मे,
स्फूर्ति भरते,
रेत से नीचे जा,
धरती के हृदय में जा मिलते,
अमृत सम ऊपर आकर,
मानव की,
प्यास हरते।
या बादल बन,
फिर से,
रंग प्रकृति में भरते।

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बादल जो घिरे,
कई रंगों से भरे,
आपस मे मिले,
मिल कर कड़के,
किरणों से मिले,
सतरंगी आँचल लिए,
कल्पना के पटल पर,
हजारो रंग भर दिए,
आकाश में,
उन्मुक्त विचरते,
पवन के वेग संग,
आंनद में भरते,
हज़ारो बूंद बन,
धरती पर बिखरते,
नाचती कूदती बूंदों सी,
अठखेलिया करते,
मिल कर रेत संग,
उसके सीने में दफन होते,
हर एक के जीवन मे,
स्फूर्ति भरते,
रेत से नीचे जा,
धरती के हृदय में जा मिलते,
अमृत सम ऊपर आकर,
मानव की,
प्यास हरते।
या बादल बन,
फिर से,
रंग प्रकृति में भरते।

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मेरे और जिंदगी में अक्सर,
कशमकश चलती है,
अगर भागता हूँ पीछे,
तो और तेज भागती है,
थक कर ठहर जाऊ,
तो यह भी थमी सी लगती है,
अगर मैं खुशी से देखु,
तो यह सतरंगी सी दिखती है,
अगर बैठ कर सोचु,
तो यह खाली केनवास सा दिखती है,
अगर मैं बनु ज्यादा चालक,
यह उलझी सी लगती है,
अगर में लेने लगू आनंद,
यह बड़ी सुलझी दिखती है,
जिंदगी अगर में तमन्ना के पहाड़ चुनु,
बहुत दूर सी दिखती है,
अगर मैं चुन लू संतोष का फल,
यह परिपूर्ण सी दिखती है।

दोस्तो एक बात यही समझ मे आयी है, जीवन आपकी अपनी कृति है, जैसा आप बनाना चाहते हो, बनती जाती है, रंग भरो तो रंगीन, तेज चलो तो तेज, आनंद लो तो सहज……

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गुजरा जब कालेज के सामने से,
नज़र पड गयी बरबस कालेज के द्वार पर,
सहम गया वक्त, और ठिठक कर रुक गया,
निकल रहा था दोस्तो की वो टोला,
कुछ हाथों में हाथ थे, कुछ कंधे साथ थे,
कोई हंस रहा था, कोई खीज रहा था,
वक्त शायद 18 साल पहले चला गया था,
चल पड़ा वो पुराना चलचित्र फिर आंखों में,
वो मंजर कैसे भूल पाओगे।

एक दिल आजादी का जश्न मनाता था,
तो एक दिल भविष्य के सपने सजाता था,
वो पहले दिन रैंगिग का डर खूब सताता था,
वो पहले दिन क्लास में नए लोगो से मिलना खूब भाता था,
कुछ नए दोस्तो, कुछ नए चहरो से मिलना समझ आता था,
अपने किस्से, उनकी कहानी सुनना नए अनुभव लाता था,
इनमे से कुछ दोस्त अनमोल बन जायेंगे, ये कौन समझ पाता था,
नया अनुभव, आजादी, दोस्त, पहले दिन का अकेलापन, कैसे भूल पाओगे।

वो केंटीन में समोसे खाना,
बैठ कर ठहाके लगाना,
आज तेरी कल मेरी बारी लगाना,
एक कोल्ड ड्रिंक से 3 दोस्तो को निपटाना,
अपना खत्म कर, दूसरे के हिस्से पर हाथ चलाना,
बैठ कर टेबल का तबला बजाना,
अपने को अनु मालिक समझ गाने गाना,
कभी कॉलेज के बाहर छोले कुलचे खाना,
केले वाले से भाव ताव लगाना,
कोने वाली दूकान में पेट्टी, कोल्डड्रिंक की पार्टी उड़ाना,
क्या वो पल वापिस नहीं लाना चाहोगे।

दोस्तों से गुहार लगाते थे,
ट्यूशन के पैसे बचाते थे,
दोस्तों के ट्यूशन नोट्स की कॉपी कराते थे,
बटुए में ज्यादा कुछ नहीं होता था,
पर दिल में बहुत अमीरी हुआ करती थी,
दोस्तों के रूप में बहुत सी बैंक आस पास घुमा करती थी,
कभी किसी को पैसे की कमी नहीं खलती थी,
वो रईसी के दिन, वो साथ, कैसे भूल पाओगे।

वो बर्थडे का दिन आना,
कई दिन से पैसे बचाना,
महीनो की पाकेट मनी का साफ़ हो जाना,
भाई के बर्थडे पर ग्रैंड पार्टी होगी,
दोस्तों की ऐसी रटन लगाना,
कमीनो का एक भी गिफ्ट ना लेकर आना,
पार्टी में बिन बुलाए फ्रेंड्स को ले आना,
बजट बिगड़ता देख खुद ही पैसे मिलाना,
वो अपनापन, वो बर्थडे, वो दोस्त, कैसे भूल पाओगे।

क्लास बंक करने में बड़ा मजा आता था,
फिर कैंटीन या लाइब्रेरी में बैठा जाता था,
लड़कियों के लिए यह जगह सबसे सेफ थी,
सबसे ज्यादा प्यार के अफ़साने यही गाये जाते थे,
कुछ हँसते चहरे तो, कुछ टूटे दिल पाये जाते थे,
कुछ दोस्त किसी रोते को मनाते पाये जाते थे,
वो कंधे, वो अफ़साने, वो दीवाने, अब कहाँ ढूंढ पाओगे।

परीक्षा के दिन गजब ढाते थे,
अटेंडेंस पूरी करने के लिए NSS, का सहारा लगाते थे,
फाइन भर कर परीक्षा में एंट्री पाते थे,
दिन रात एक हो जाते थे,
केंटीन खाली तो लाइब्रेरी फुल हाउस बन जाते थे,
नोट्स बदलने के सिलसिले और तेज हो जाते थे,
आपस में गठबंधन बनाये जाते थे,
फिर भी जब एक के ज्यादा और दूसरे के कम नंबर आते,
तो कमीनेपन के इल्जाम लगाये जाते थे,
वो समन्वय, वो प्यार भरा धोखा, कैसे भूल पाओगे।

आ गया था अंतिम दिन,
आँखे अब होती थी नम,
नम्बर एक्सचेंज करते थे,
गले मिल कर रोते थे,
Keep in Touch कहते थे,
कितने पीछे छूटे थे,
कितने सपने टूटे थे,
काश वो दिन लंबे हो जाते,
काश वो दिन वापिस आ जाते,
………वो सब कैसे भूल पाओगे………

आज सारे वादे टूट गए है,
जिंदगी की आपाधापी में खो से गए है,
समय की रफ़्तार ऐसी थी,
नौकरी और पैसे की भूल भुलैया में खो से गए है,
आज भी आई याद तो,
होठों पर मुस्कान,
और आँख में नमी आई,
जीने की एक ललक फिर से भर आई,

दोस्तों…
एक बार वापिस मुड़कर देखो,
जिंदगी वापिस मिल जायेगी,
गम की काई मिट जायेगी,
वो यादे फिर से मिल जायेगी,
नजरे रोशन हो जायेगी,
जीवन की उमंग मिल जायेगी।

ना कुछ भूल पाये हो, ना कुछ भूल पाओगे………

ना कुछ भूल पाओगे………

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आओ सुनाऊ तुम्हे एक कहानी,
एक था राजा, एक थी रानी,
खूब किया खर्च, अब कम बचा पानी,
त्राहि चहु और, बस पानी ही पानी।
आओ सुनाऊ……

राजा था जिद्दी, पानी वेस्ट करता,
ना कहा सुनता, घंटो नाहता रहता,
राज्य में सुखा, सब कुओं का पानी,
खूब ढूंढा, पर ना मिले पानी,
पानी न मिलता, पानी ना बनता,
ये तो है, खुदा की मेहरबानी।

हर तरफ दंगे, बस चाहिए पानी,
पर पानी ना मिला, था खत्म अब पानी,
राजा था बेबस, बेबस थी वो रानी,
प्यास से आजिज, मर रहे प्राणी,
मर गया राजा, मर गई रानी,

रह गया अब तो बस आंख में पानी,
त्राहि चहु और, बस पानी ही पानी।

यही है हमारे फ्यूचर की कहानी,
सोचो थोड़ा सा, तुम चिंतन कर लो,
पानी का थोडा, संरक्षण कर लो,
कल न कहना, अब ना बचा पानी,
सुखद अंत से हो खत्म कहानी,
खुश रहे प्रजा, खुश राजा रानी।
आओ सुनाऊ तुम्हे एक कहानी…..

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रोटियों की भाषा जानती है,
भूख की वर्णमाला जानती है,
प्यार की परिभाषा जानती है,
हर समस्या की औषध जानती है,
हाँ, यह औरत है,
जो मुझको मुझसे बेहतर जानती है।
कभी मां बनकर मुझे पालती है,
कभी बहन बनकर स्नेह उड़ेलती है,
कभी पत्नी बनकर परछाई बनती है,
कभी बेटी बनकर उमंगे भरती है,
हाँ, यह औरत है,
जो मुझमे ऊर्जा का संचार करती है।
बच्चो को देख हरी होती है,
भाई को देख झगड़ती है,
पति को देख रूठती है,
पिता को देख नखरे करती है,
हाँ, यह औरत है,
जो मुझमे जीवन के रंग भरती है।
यह जीवन भर त्याग करती है,
जीवन भर याद करती है,
जीवन भर साथ देती है,
जीवन भर फिक्र करती है,
हाँ, यह औरत है,
जो जीवन को पूर्ण करती है।

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अरमानों के बोझ तले,
समय कहीं खो गया है,
परेशानियों का आलम,
अब तो आम हो गया है,
शिकायतों की पोटलियों का,
घर में अम्बार हो गया है,
तकलीफो का भार ढोते ढोते,
जीवन ये बेजार हो गया है,
थकान का आलम ये हैं “भरत”,
शकून नाम का शब्द,
कहीं गुम हो गया है।

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