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Posts Tagged ‘झगड़े’


मुखौटे में छिपे, हज़ार मुखौटे,
कुछ है काले, कुछ है गोरे,
कुछ छुपाना चाहे,
कुछ बतलाना चाहे,
पर वर्तमान की जरूरत,
बन गए हैं मुखौटे।
क्योकि इन मुखौटों ने,
कई राज छुपा रखे है,
कुछ ने चेहरे पे मुखौटे तो,
कुछ ने मुखौटे पे मुखौटे लगा रखे है।

कुछ है उदासी को समेटे,
कुछ ने आँसू छुपा रखे है,
तन्हाई लेकर कुछ बैठे,
कुछ ने दर्द छुपा रखे है,
कुछ ने खुशियां दबा रखी है,
कुछ ने नींदे चुरा रखी है,
कुछ ने मजबूती दी है,
कुछ ने कमजोरी छुपा रखी है,
कुछ ने फरेब दबा रखा है,
कुछ ने ईष्या छुपा रखी है,
कुछ पापी है इसके पीछे,
कुछ ने पूण्य छुपा रखे है,
कुछ रावण है भीतर बैठे,
कुछ ने राम छुपा रखे है,
कुछ ने फूल उगाये अंदर,
कुछ ने जहर छुपा रखे है,
दीपक भी बन बैठे सूरज,
तल पे अंधेरे छुपा रखे है,
मुखोटा ओढ़ कर,
मिलते है हज़ारो मुझसे,
कुछ ने आशीर्वाद रखे है,
कुछ ने खंजर छुपा रखे है॥

दुनिया है यह बहुत अनोखी,
सच्चाई से दूर भागती,
सबको सुख देने की ख्वाहिश,
“भरत” गम अंदर ही दबा रखे है॥
मुखौटे पे मुखौटे लगा रखे है॥

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पुराने सफर के कुछ अवशेष उठा लो,
भूत में जाकर कुछ यादें चुरा लो,
पुराने, भूले-बिसरे रिश्ते, फिर बनालो,
अपने चाहने वालो को गले लगा लो,
क्या पता इस जीवन में “भरत”,
कब विश्राम हो जाये,
करने तो बहुत कुछ बाकी था,
पर समय ही शेष हो जाये।

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