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Posts Tagged ‘बीज’


बीज धरती में दबा,
थी पौधा बन जाने की क्षमता,
सिर्फ मिट्टी और नमी का सहयोग काफी ना था,
मिट्टी से निकल बाहर,
महसूस की थी सूरज की तपिश,
ठंडी हवा के संग बस चहकना काफी ना था,
दिया आसरा तितलियों को,
भंवरो ने भी रसपान किया,
सिर्फ कोपलों का निकलना काफी ना था,
प्रभु चरणों मे अर्पित हुआ,
सहा था टहनी से बिछोह का गम,
बस फूल बन इठलाना काफी ना था,
मुकाम जिंदगी में पाया उसने,
हर बाधा को हटाया उसने,
दुसरो के भरोसे बैठना काफी ना था॥

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