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Posts Tagged ‘बेगवानी’


कुछ अक्स बस दिल मे रह जाते है,
घोंसले छोड़ परिंदे भी उड़ जाते है,
वो सूरते जिनको देख कर जीते थे,
ये चक्षु अब देखने को तरस जाते है,
जिंदगी के रंगमंच पर निभा,
अपना किरदार बखूबी,
दुखद अंत के साथ,
आंखों में अश्क़ पिरो जाते है,
चले जाते है यकायक ऐसे,
जाने वाले लौट के नही आते है॥

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जीवन क्या है,
कुछ सांसो का ताना बाना है,
जब तक सांस है,
तब तक साथ है,
सांस छूटी, साथ छूट जाना है,
एक सांस का आना है,
साथ ही एक सांस का जाना है,
अंत मे तुझे अकेले ही रह जाना है,
जब तू छोटा बच्चा था,
सब तुझको पूछा करते थे,
जब जवानी आई,
सब तुझे माना करते थे,
बुढ़ापे में तेरे पास,
सब समय बिताया करते थे,
ये सब एक पड़ाव था,
बस तेरा एक गुमान था,
प्राण निकलते ही तो तू,
अपवित्र हो जाता है,
मरघट ही अंत ठिकाना है,
धु धु कर जल जाना है,
अंतिम पड़ाव चित्ता पर भी,
अकेले ही रह जाना है,
चित्ता के आग पकड़ते ही,
सबको साथ छोड़ जाना है,
कुछ दिन का है रोना धोना,
फिर सब कुछ भूल जाना है,
जी ले सार्थक जीवन,
ना कुछ लेकर आया था,
ना कुछ लेकर जाना है,
जीवन मौत के बीच पड़ाव का,
ज्यादा लाभ कमाना है,
यह जीवन सार्थक बनाना है।

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बीज धरती में दबा,
थी पौधा बन जाने की क्षमता,
सिर्फ मिट्टी और नमी का सहयोग काफी ना था,
मिट्टी से निकल बाहर,
महसूस की थी सूरज की तपिश,
ठंडी हवा के संग बस चहकना काफी ना था,
दिया आसरा तितलियों को,
भंवरो ने भी रसपान किया,
सिर्फ कोपलों का निकलना काफी ना था,
प्रभु चरणों मे अर्पित हुआ,
सहा था टहनी से बिछोह का गम,
बस फूल बन इठलाना काफी ना था,
मुकाम जिंदगी में पाया उसने,
हर बाधा को हटाया उसने,
दुसरो के भरोसे बैठना काफी ना था॥

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ये कैसी तमन्ना है,
जो फिर से जी उठती है,
उनकी एक झलक काफी नही,
ये कैसी चाहत है,
जो अधूरी सी रह जाती है,
उनका मेरे जीवन मे आना काफी नही,
ये कैसा परिंदा है,
जो उन्मुक्त गगन में भी फड़फड़ाता है,
पिंजरा खोल देना ही काफी नही,
अंदर अब भी है घुटन,
तोड़ दो सारी दीवारे आज,
दरवाजा खोल देना काफी नही,
बहुत कुछ पाना है,
मिल जाये दो चार जीवन और,
ये एक जिंदगी काफी नही॥

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पिता पुत्र आपस मे बतिया रहे थे,
किस्से अपने अपने सुना रहे थे,
पिता बोले-
एक समय ऐसा होता था,
जब नौकरी मे इतना पैसा नही होता था,
तब भी हम अच्छे से घर चलाते थे,
और दो पैसे भी बचाते थे,
50 रूपये लेकर जाते थे,
और महीने भर का राशन ले आते थे,
बेटा बोला-
पिताजी आजकल यह मुमकिन नही होता है,
हर दुकान मे CCTV लगा होता है॥

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नए सपने लेकर,
नए संकल्प लेकर,
नयी रौशनी संग,
नया सवेरा आया है ।
पंख लगा कर गगन में उड़ ले,
आँखों में अरमान भर ले,
खुले आसमान में सितारों संग,
नया सवेरा आया है ।
ओस के मोती सजाये,
कलियों के अरमान जगाये,
कोयल के मधुर गान संग,
नया सवेरा आया है ।
सपने सुहाने नए साल में,
बिखरे मुस्काने नए साल में,
नव संकल्प हो नए साल में,
बढे प्रेम इस नए साल में,
चहु और खुशहाली नए साल में,
प्रेम शकुन की बंसी के संग,
नया सवेरा आया है ।

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जज्बात लेकर चला था कुछ,

अरमान लेकर निकला था कुछ,

राहे भी वो अजीब थी,

राही भी कुछ अजीब थे,

चलता रहा बिना रुके,

चलता रहा बिना थके,

ना कोई हिसाब था,

ना कोई परवाह थी,

आज मंजिल पर पहुँच कर,

पता चला अ “भरत”

मंजिले बहुत महँगी थी,

सारे अरमान खर्च हो गए||

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