Feeds:
Posts
Comments

Posts Tagged ‘राजलदेसर’


इस राखी पर बहना तुम, इतना सा धर्मं निभा देना,

भाई से चाहे मिल ना पाओ,सास ससुर का मान बढ़ा देना,

ननद तुम्हारी शायद, ससुराल रोज ना आ पाए,

जब भी आये मेहमान बनकर, आकर तुरंत ही चली जाए,

बहु तुम्हे वो समझे भी तो, बेटी का धर्म निभा देना,

पीहर के संस्कारों से, ससुराल की बगिया महका देना,

तुम भी हो बेटी किसी की, इस बात को ना भुला देना,

रखना ख्याल सास ससुर का, बस इतना धर्म निभा देना|

 

माँ कहती है बहना तेरी, ससुराल में सुख तू पायेगी,

मिलने गर ना भी आ पाए, माँ-बाप का मान तो बढ़ाएगी,

दे प्यार सभी को इतना तू, इतनी अपनी हो जाएगी,

ननंद की कमी को भी तू, शायद पूरा भर पायेगी,

रिश्ते नातो की गर्माहट से, तू घर को स्वर्ग बनाएगी,

आँखों से चाहे दूर सही, माँ तेरी मोद मनाएगी|

 

जलता हु किस्मत से तेरी, तू दो-दो माँ-बाप पायेगी,

दो-दो माँ के चरणों में, दो-दो स्वर्ग, लुत्फ़ उठाएगी,

पीहर को आबाद किया, ससुराल को स्वर्ग बनाएगी|

बेटी बन कर उभरी है, बहु बनकर जानी जाएगी|

 

रिश्तो की यह गर्माहट, जीवन भर इसे अलाव देना,

जो सास ससुर खुशियाँ बांटे, बादल बन उन्हें समा लेना,

गर गुस्सा उन्हें आ जाए कभी, तुम प्यार भरी फुहार देना,

जब उम्र का तराजू झुकने लगे, चिडचिडापन उनका बढ़ने लगे,

तुम स्नेह का बादल बनकर के, भर भर कर बरसा देना,

जो प्यार दिया मुट्ठी भरकर, “भरत” वो अतुलित प्यार बना देना|

 

भाई की आशीष यही, माँ-बाप की ख्वाहिश यही,

बेटी बन कर तू रही यहाँ, बेटी वहां भी बन जाएगी,

सास ससुर की सेवा में, बस इतना धर्म निभा देना|

Read Full Post »


भाव के गुलदस्ते से झलकता,
अप्रतिम प्यार हो तुम,
गुदगुदाती, खिलखिलाती,
ह्रदय की झंकार हो तुम,
शून्य सी पड़ी चेतना में,
प्राण का संचार हो तुम,
जिंदगी के वाद्य का,
अनछुआ सा तार हो तुम,
दे दिए सुर कई अनोखे,
सूक्ति का संचार हो तुम,
गीत जो लिखने चला था,
गीत का हर भाव हो तुम,
आँख बंद कर बैठे क्षण भर,
स्वपन का आभास हो तुम,
गर खुले आँखे स्वपन से,
तेज बन साकार हो तुम,
दीप भी तुम, बाती भी तुम,
लौ बन प्रज्ज्वलित होती,
अग्नि की आहुति हो तुम,
कुछ कहा सा, कुछ सुना सा,
कुछ गढ़ा सा, अनगढ़ा सा,
कुछ बुना सा, अनबुना सा,
कुछ सुखद सा, कुछ दुखद सा,
“भरत” अनुभूतियों में बसा ,
मेरा सारा संसार हो तुम।

Read Full Post »


पिता पुत्र आपस मे बतिया रहे थे,
किस्से अपने अपने सुना रहे थे,
पिता बोले-
एक समय ऐसा होता था,
जब नौकरी मे इतना पैसा नही होता था,
तब भी हम अच्छे से घर चलाते थे,
और दो पैसे भी बचाते थे,
50 रूपये लेकर जाते थे,
और महीने भर का राशन ले आते थे,
बेटा बोला-
पिताजी आजकल यह मुमकिन नही होता है,
हर दुकान मे CCTV लगा होता है॥

Read Full Post »


नए सपने लेकर,
नए संकल्प लेकर,
नयी रौशनी संग,
नया सवेरा आया है ।
पंख लगा कर गगन में उड़ ले,
आँखों में अरमान भर ले,
खुले आसमान में सितारों संग,
नया सवेरा आया है ।
ओस के मोती सजाये,
कलियों के अरमान जगाये,
कोयल के मधुर गान संग,
नया सवेरा आया है ।
सपने सुहाने नए साल में,
बिखरे मुस्काने नए साल में,
नव संकल्प हो नए साल में,
बढे प्रेम इस नए साल में,
चहु और खुशहाली नए साल में,
प्रेम शकुन की बंसी के संग,
नया सवेरा आया है ।

Read Full Post »


उसके चेहरे को देख कर लग रहा था की जैसे यह कई दिनों से सोई नहीं है, चेहरे पर थकान की रेखा उभरती तो थी, पर मात्र एक क्षण के लिए| शायद किसी बात का शकुन था जो थकान को एक पल से ज्यादा टिकने ही नहीं देता| रोज देख कर लगता था कि यह महिला किसी भिखारी गैंग का ही हिस्सा है, लेकिन आज मन ने कहा और मैंने 10 का नोट उसके हाथ पर रख दिया, दिल से दुआयें देती वह आगे निकल गई| शाम को आफिस से वापिस आते समय जब लाल बत्ती पर लगे जाम में रुका तो उसी महिला को फुटपाथ पर बैठा देख कर नज़रे उसी पर केन्द्रित हो गयी| हाथ पंखे से स्ट्रीट लाईट में बैठे, नई स्कूल ड्रेस पहने, नया बेग पास में रखे, एक वर्ण माला की किताब हाथ में लिए, एक 6 वर्षीय बालक को पंखा झलते हुए उस माँ के चहरे पर एक ख़ुशी झलक रही थी| शायद जीवन की कठिनाइयो को सहन कर सीप सम कठोर माँ केआँचल में एक अनमोल मोती मूर्त रूप ले रहा था|

Read Full Post »


जिंदगी बदलती रही, सवालात बदलते रहे,
वक्त बदलता रहा, हालात बदलते रहे,
राहे बदलती रही, राही बदलते रहे,
“भरत” इतने बुरे भी नहीं थे हम,
ना जाने क्यों, लोगो के ख्यालात बदलते रहे।।

Read Full Post »


होठों में क्या बात छुपी,
मुस्कान अधूरी लगती है,
आँखों में है नींद छुपी,
तलाश अधूरी लगती है,
धड़कन में ख़ामोशी सी,
ये बाते अधूरी लगती है,
ना दिखे अगर तू महफिल में,
महफ़िल अधूरी लगती है,
जाने क्यों तेरे बिन “भरत”,
ये शाम अधूरी लगती है ।।

Read Full Post »

Older Posts »