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Posts Tagged ‘marriage’


रोटियों की भाषा जानती है,
भूख की वर्णमाला जानती है,
प्यार की परिभाषा जानती है,
हर समस्या की औषध जानती है,
हाँ, यह औरत है,
जो मुझको मुझसे बेहतर जानती है।
कभी मां बनकर मुझे पालती है,
कभी बहन बनकर स्नेह उड़ेलती है,
कभी पत्नी बनकर परछाई बनती है,
कभी बेटी बनकर उमंगे भरती है,
हाँ, यह औरत है,
जो मुझमे ऊर्जा का संचार करती है।
बच्चो को देख हरी होती है,
भाई को देख झगड़ती है,
पति को देख रूठती है,
पिता को देख नखरे करती है,
हाँ, यह औरत है,
जो मुझमे जीवन के रंग भरती है।
यह जीवन भर त्याग करती है,
जीवन भर याद करती है,
जीवन भर साथ देती है,
जीवन भर फिक्र करती है,
हाँ, यह औरत है,
जो जीवन को पूर्ण करती है।

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अरमानों के बोझ तले,
समय कहीं खो गया है,
परेशानियों का आलम,
अब तो आम हो गया है,
शिकायतों की पोटलियों का,
घर में अम्बार हो गया है,
तकलीफो का भार ढोते ढोते,
जीवन ये बेजार हो गया है,
थकान का आलम ये हैं “भरत”,
शकून नाम का शब्द,
कहीं गुम हो गया है।

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समय का पहिया चलता गया,
कुछ मैं भी उसके साथ चला,
कुछ ढंग बदला,
कुछ रंग बदला,
कुछ तो अपने आप चला।
कुछ ममता के आंचल में,
कुछ अनजानी सी नजरो में,
चंद लोगो की बातों में,
सबको अपनाते अपनाते,
मेरा ये जीवन साथ चला।
अनजाना आभास लिए,
कुछ चातक की सी प्यास लिए,
चंदा सा उजास लिए
तारों की मीठी छांव चला।
कुछ कुछ पुरानी यादें है,
कुछ आधे अधूरे वादे है,
कुछ रास्तो को समझाना है,
कि मैं भी उनके साथ चला।
जीवन यू बदलता जाता है,
बचपन से यह जब निकले,
बंधन में बंधता जाता है,
“भरत” जीवन के पड़ावों में,
मैं तो सबके साथ चला,
दरिया ज्यो मैं प्यास बुझाता,
मैं तो सबके साथ चला॥

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भाव के गुलदस्ते से झलकता,
अप्रतिम प्यार हो तुम,
गुदगुदाती, खिलखिलाती,
ह्रदय की झंकार हो तुम,
शून्य सी पड़ी चेतना में,
प्राण का संचार हो तुम,
जिंदगी के वाद्य का,
अनछुआ सा तार हो तुम,
दे दिए सुर कई अनोखे,
सूक्ति का संचार हो तुम,
गीत जो लिखने चला था,
गीत का हर भाव हो तुम,
आँख बंद कर बैठे क्षण भर,
स्वपन का आभास हो तुम,
गर खुले आँखे स्वपन से,
तेज बन साकार हो तुम,
दीप भी तुम, बाती भी तुम,
लौ बन प्रज्ज्वलित होती,
अग्नि की आहुति हो तुम,
कुछ कहा सा, कुछ सुना सा,
कुछ गढ़ा सा, अनगढ़ा सा,
कुछ बुना सा, अनबुना सा,
कुछ सुखद सा, कुछ दुखद सा,
“भरत” अनुभूतियों में बसा ,
मेरा सारा संसार हो तुम।

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