Feeds:
Posts
Comments

Posts Tagged ‘Mukti’


अरमानों के बोझ तले,
समय कहीं खो गया है,
परेशानियों का आलम,
अब तो आम हो गया है,
शिकायतों की पोटलियों का,
घर में अम्बार हो गया है,
तकलीफो का भार ढोते ढोते,
जीवन ये बेजार हो गया है,
थकान का आलम ये हैं “भरत”,
शकून नाम का शब्द,
कहीं गुम हो गया है।

Advertisements

Read Full Post »


एकरस में डूबे जीवन को,
जो छोड़ कर आगे बढ़ता है,
छोड़ बहाने मुश्किल के,
संघर्षों की अग्नि में तपता है,
बन जाता है नायक वो,
एक अलग कहानी लिखता है।
सर्द हवा या गर्म हवा हो,
आंधी हो, तूफान मचा हो,
पंछी सारे भयभीत होते जब,
बाज उड़ाने भरता है।
संघर्षों की अग्नि में तपता है,
वह अलग कहानी लिखता है।
अवांछित मोड़ हो राहों में,
कंकड़ पत्थर भी मिल जाते है,
कांटो की परवाह नही,
जो अंगारो पर चलता है।
वह अलग कहानी लिखता है।
कुछ नीवों में लग जाता है,
कुछ पैरों में बिछाया जाता है,
जो चोटों को सह जाता है,
वो मंदिर में सजाया जाता है।
जो बैसाखी ले सहारे की,
उजालो में निकलता है,
रात मुश्किलो की आते ही,
वो बेसहारा हो जाता है,
जो खुद के दम पर चमक सके,
अंधेरो से ना डरता है,
खुद बनता है सूरज जग में,
औरो को रोशन करता है।
वह अलग कहानी लिखता है।
जो हिम्मत की भट्टी दहकाएँ
स्वाभिमान की गाथा गाए,
मेहनत की चक्की में पीसकर,
जब भाग्य सितारा चमकता है॥
संघर्षों की अग्नि में तपकर,
वह अलग कहानी लिखता है॥

Read Full Post »


Check this out: गागर में सागर (Gagar Me Sagar) (Hindi Edition) http://www.amazon.in/dp/B0746PZX4F/ref=cm_sw_r_wa_awdo_mJIEzbCCTME4X

Read Full Post »