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Posts Tagged ‘New Year’


रोटियों की भाषा जानती है,
भूख की वर्णमाला जानती है,
प्यार की परिभाषा जानती है,
हर समस्या की औषध जानती है,
हाँ, यह औरत है,
जो मुझको मुझसे बेहतर जानती है।
कभी मां बनकर मुझे पालती है,
कभी बहन बनकर स्नेह उड़ेलती है,
कभी पत्नी बनकर परछाई बनती है,
कभी बेटी बनकर उमंगे भरती है,
हाँ, यह औरत है,
जो मुझमे ऊर्जा का संचार करती है।
बच्चो को देख हरी होती है,
भाई को देख झगड़ती है,
पति को देख रूठती है,
पिता को देख नखरे करती है,
हाँ, यह औरत है,
जो मुझमे जीवन के रंग भरती है।
यह जीवन भर त्याग करती है,
जीवन भर याद करती है,
जीवन भर साथ देती है,
जीवन भर फिक्र करती है,
हाँ, यह औरत है,
जो जीवन को पूर्ण करती है।

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अरमानों के बोझ तले,
समय कहीं खो गया है,
परेशानियों का आलम,
अब तो आम हो गया है,
शिकायतों की पोटलियों का,
घर में अम्बार हो गया है,
तकलीफो का भार ढोते ढोते,
जीवन ये बेजार हो गया है,
थकान का आलम ये हैं “भरत”,
शकून नाम का शब्द,
कहीं गुम हो गया है।

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छोटे छोटे दिन थे, थी छोटी छोटी रात,

सपने थे बड़े बहुत, मस्ती के जज्बात,
टिमटिमाते तारे देखे, सारी सारी रात,
खेल खिलोने लेकर, जागे सारी रात,
चंदा की चांदनी, सितारों की बारात,
नींद ना आई हमको सारी सारी रात,
खुशियो की खाने खोदी, सारी सारी रात,
आंखों को जगाया हमने सारी सारी रात,
दिन भी गुजरते रहे, गुजर गई रात,
सपने तो बड़े हुए, रोते जज्बात,
आज भी खोजे मन, फिर वही रात॥

बादल खिलौना था, कई थे आकार,
कभी दिखते हाथी घोड़े, थे नाना प्रकार,
हम घूमे, सारी दुनिया फिर घूमती दिखे,
खुशियां फिर चारो तरफ झूमती दिखे,
बन हनुमान हम वीर बने,
सूरज को झटपट मुँह में धरे,
बादल मे बिजली सी रोशनी भरे,
एक इशारे से फिर बिजली गिरे,
काला बादल मेरा, तेरा सफेद लड़े,
वरुण अस्त्र छोड़े तो फिर बूंदे निकले,
हाथ दिखा कर फिर तो चक्र चले,
मस्ती में डूबा दिन अब यू ही ढले,
बेफिक्रे होकर हम तो यू गिर पड़े,
निद्रा हमे ले आंचल में बेसुध करे।

हर जगह अपना ही राज चलता था,
जंगल का राजा मैं शेर बनता था,
सारे जंगल पर मैं राज करता था,
हाथी हो या भालू चाहे,
किसी से ना डरता था,
विहग बन नभ में , उन्मुक्त विचरे,
कभी बन मछली,जल की रानी बने,
कभी बन मेंढक,मस्ती में उछले,
जंगल मे मंगल के साक्षी बने,
स्वछन्द हो जीवन में, आनंद बिखरे।

 

बचपन मे कल्पना की शक्ति फलती थी,
जो भी मन मे आये वो मर्जी चलती थी,
कभी बन डाक्टर इलाज़ करता था,
रोने वाले बच्चों को इंजेक्शन देता था,
कभी बन रोगी मैं गोली लेता था,
कभी बन ईंजन, मैं रेल बनता था,
सारे डिब्बों में ऊर्जा भरता था,
कभी बस कंडक्टर, तो पोस्टमेन बनता था,
कभी नाई बन कर शेव करता था,
कभी प्रधानमंत्री बन, भाषण देता था,
15 अगस्त को सलामी लेता था,
कभी हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई बनता था,
सर्वधर्म समभाव की बाते करता था,
कभी जैन मुनि बन भिक्षा लेता था,
खेल में ही कर्मो का क्षय करता था,
जीवन वो अद्भुत रचना लगती थी,
मन मे खुशी की लहरें बहती रहती थी।

बचपन सुहाना अब याद बहुत आता है,
बच्चो को देख मन हरा हो जाता है,
लौट कर फिर जाना अब ना मुमकिन होगा,
किन्तु मन में वो मस्ती लाना मुश्किल ना होगा,
दुनियादारी में से कुछ समय निकालो,
गुमशुम बचपन को अंदर से खोज निकालो,
“भरत” दोस्तो से फिर अपना मेल बिठालो,
जीवन मे बचपन को फिर से बुलालो।

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मन से मन का मैल मिटाये,
आओ इस दीवाली में,
जग मग मन का हर कण बनाए,
आओ इस दीवाली में,
अमीरो के घर पर शोर शराबा,
चलो गरीब के घर दीप जलाए,
आओ इस दीवाली में।

कुछ ऐसा संकल्प कर ले,
आओ इस दीवाली में,
रोटी रूपी रोशनी महके,
हर एक गरीब की थाली में,
जग में खुशियों के दीप जलाए,
आओ इस दीवाली में।

शुद्ध आचरण की बगिया महके,
दुष्ट आचरण की थाली खाली,
आओ इस दीवाली में,
हो नैतिकता की प्राण प्रतिष्ठा,
मानवता के पुष्प खिलाये,
आओ इस दीवाली में।

तिमिर का कर नाश,
सत्य का दीप जलाये,
आओ इस दीवाली में।
तमसो म ज्योतिर्गमय का
भाव जगाये,
आओ इस दीवाली में।

हो महावीर सी समता साधना,
सुख संतोष समाये मन में,
आओ इस दीवाली में।
कुंठाओ का ह्रास करे,
अंतर्मन का दीप जला कर,
“भरत” आओ इस दीवाली में॥

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मत कर क्रंदन, ओ मेरे मन,

नव दिन आया, कर अभिनन्दन|

भूल पुराने दुःख के दिन,

नव दिन आया, कर अभिनन्दन|

पेड़ों पर फिर पंछी चहके,

सुरम्य हो गया फिर उपवन,

भौर हुई, ये राते बीती,

सुखमय होगा हर एक क्षण||

चलने लगे नभ से सितारे,

आने को आतुर है किरण,

नभ से कालिख हटने लगी,

लगने लगा सिंदूरी गगन||

दिल से दिल का रिश्ता जुड़े,

मिल जाये हर एक का मन,

विश्व शान्ति का मार्ग प्रशस्त हो,

ऐसी बिखरे पहली किरण||

निर्मल धारा बहे जगत में,

कही कभी ना हो अनबन,

खुशहाली का लेप लगा कर,

शीतल हो जाए हर एक मन||

नव दिन आया, कर अभिनन्दन|

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नए सपने लेकर,
नए संकल्प लेकर,
नयी रौशनी संग,
नया सवेरा आया है ।
पंख लगा कर गगन में उड़ ले,
आँखों में अरमान भर ले,
खुले आसमान में सितारों संग,
नया सवेरा आया है ।
ओस के मोती सजाये,
कलियों के अरमान जगाये,
कोयल के मधुर गान संग,
नया सवेरा आया है ।
सपने सुहाने नए साल में,
बिखरे मुस्काने नए साल में,
नव संकल्प हो नए साल में,
बढे प्रेम इस नए साल में,
चहु और खुशहाली नए साल में,
प्रेम शकुन की बंसी के संग,
नया सवेरा आया है ।

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