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Archive for March, 2011


दिल में ही जो किलस जाते अरमान,  
गर आ जाये लबों पर तो क्या बात होगी|
 
बह जाते है आँखों से अश्रु बन कर ये लफ्ज,
मिल जाए गर जुबां, तो क्या बात होगी,
 
उठती मचलती तमन्नाओ का कोई साहिल नहीं,
दबी कुचली ख्वाहिशों की कोई मंजिल नहीं,
बन जाए गर हकीकत ये तमन्ना, तो क्या……….
 
भेष बदल कर मिलते है मिलने वालें,
मतलब से ही दिल मिलाता है हर कोई,
गर बिन मतलब ही कोई मिल जाए, तो क्या……
 
बावफा ना सही, बेवफा ही सही,
दिल आजमाने को यु ही मिलते है हम,
पहचान जाए गर वफ़ा कोई, तो क्या…..
 
कोई गिला नहीं जिन्दगी, कोई शिकवा नहीं,
जिन्दा रह कर बांटता रहूँ खुशिया सबको,
मर कर भी गर खुश हो जाए कोई, तो क्या……….
 

दूर होकर भी नजदीक लगता है कोई,

नजदीक आकर भी दूर हो जाता है कोई,
नजदीक आकर गर नजदीक हो जाए, तो क्या……
 
मुमकिन हो जाए ये मुमकिन नहीं लगता,
नामुमकिन है ये, ये भी मुमकिन नहीं लगता,
यही गर मुमकिन हो जाए,
तो क्या बात होगी|
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